Women Empowerment Essay in Hindi

women empowerment essay in hindi

 

महिला सशक्तिकरण

जिस समाज में नारी का स्थान सम्मान-जनक होता है वह उतना ही प्रगतिशील और विकसित होता है ।परिवार और समाज के निर्माण में नारी का स्थान महत्वपूर्ण होता है। जब समाज सशक्त और विकसित होता है तो राष्ट्र भी मजबूत होता है। इस प्रकार राष्ट्र निर्माण में भी नारी केंद्रीय भूमिका निभाती है।माता के रूप में नारी प्रमुख गुरु होती है ।जॉर्ज हरबर्ट के अनुसार ” एक अच्छी माता 100 शिक्षकों के बराबर होती है, इसलिए उसका हर हाल में सम्मान करना चाहिए।”
भारतीय समाज में वैदिक काल में नारी का स्थान बहुत सम्मान-जनक था और हमारा अखंड भारत विदुषी नारियों के लिए जाना जाता था। परंतु कालांतर में इनकी स्थिति में हश्र हुआ और मध्यकाल आते इसका हाश्र चरम पर जा पहुँचा। ब्रिटिश काल में भी नारियों की स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ। हाँ ,परंतु थोड़े बहुत प्रयास किए गए इससे नारी की दशा सुथरे ।आज़ादी के बाद नारी की स्थिति में सुधार के लिए बहुत कानूनी प्रयत्न किए गए।

परंतु सामाजिक स्तर पर जो बदलाव आना चाहिए था वह बदलाव नहीं आया जिसका मुख्य कारण रहा , हमारी पुरुष प्रधान मानसिकता, जिसे हम बदल नहीं पाये और नारी के प्रति हमारा रवैया दोयम दर्जे का रहा। यही कारण है कि वैदिक काल में जो नारी शीर्ष पर थी आज उसके सशक्तिकरण की आवश्यकता महसूस हुई।

महिला सशक्तिकरण का मुद्दा ना केवल भारत में अपितु विश्व के सभी देशों में अहम मुड्ढा हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 8 मार्च 1975 को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत की गई। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा अनेक महिला सम्मेलनों का सफलतापूर्वक आयोजन भी किया गया।महिला सशक्तिकरण की दिशा में वियना मे मानव अधिकारों के सम्मेलन 1993 में महिला अधिकारों को मानवाधिकार के रूप में मान्यता मिली।

महिला सशक्तिकरण का अर्थ महिलाओं को घर, परिवार, समाज व राष्ट्र में अपनी क्षमता, स्वतंत्र व मुक्ति का बोध करा कर इनका सशक्त और सक्षम बनाना की वे अपने जीवन मे व्यक्तिगत एवं सामाजिक निर्णय लेने की हक़दार हो। पुरुषों के बराबर महिलाओ को वैधानिक,राजनीतिक, शारीरिक,मानसिक,आर्थिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि में स्वतंत्र निर्णय लेने का अधिकार प्रदान करना है।सच्चे अर्थ मे लोकतंत्र तभी सार्थक हो सकता है जब महिला और पुरुष, राष्ट्रीय विकास के सभी क्षेत्रों में निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हो। भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का कथन है” महिलाओं की स्थिति ही देश के विकास को सूचित करती है।” भारत में आज भी महिलाएं सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक उत्थान की मुख्यधारा से जुड़ने में रुकावटे महसूस करती हैं।

विकास लक्ष्य 2015 लिंग भेद की समानता के साथ महिला सशक्तिकरण को समर्पित है सतत विकास के लक्ष्य भी महिला विकास से जुड़े हुए हैं महिलाओं के लिए गुणवत्ता युक्त शिक्षा व्यवसाय व रोज़गार मुखी शिक्षा का विकास करके उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना को आत्मनिर्भर बनाना है साथ ही महिला विकास से जुड़ी समस्याओं जैसे बाल विवाह दहेज़ प्रथा यौन शोषण कार्य स्थल पर महिलाओं का शोषण जैसी समस्याओं को समाप्त करना है

ऐसा नहीं है कि भारत में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए प्रयास नहीं हुए। हमारे देश में नारी शक्ति को बल देकर महिलाओं का उन्नयन का प्रयास जारी है किंतु लैंगिक भेदभाव की प्रवृतियां सदैव आड़े आती रही हैं।भारत में सैन्य क्षेत्र में वर्ष 1992 से जहां महिलाओं को कमीशन देने की शुरुआत हुई वहीं केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा महिलाओं को पंचायतों तथा स्थानीय निकायों में आरक्षण की भी व्यवस्था की जा चुकी है। भारतीय संविधान के माध्यम से भी महिलाओं को विभिन्न संवैधानिक संरक्षण प्रदान किया गया है।महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सरकार की तरफ से विभिन्न प्रयास किए गए है। महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए 9 सितंबर 2005 को पैतृक संपत्ति में बेटे के समान बेटी को अधिकार देने वाला कानून, घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम-2005 आदि पारित किए गए हैं। 31 जनवरी 1992 को” राष्ट्रीय महिला आयोग” का गठन किया गया जो महिलाओं के संविधान तथा कानूनी सुरक्षा के अधिकारों को ठीक ढंग से लागू करता है महिला हितों को ध्यान में रखकर हैं 9 दिसंबर को भारत में बालिका दिवस मनाया जाता है।

वर्तमान समय में भी महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सरकार द्वारा स्किल इंडिया, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, स्टार्टअप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया व दीन दयाल अन्योंदय योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण जीविकोपार्जन योजना,बेटी बचाव बेटी पढ़ाओ योजना, बालिका सुकन्या समृद्धि योजना, उज्जवला योजना आदि जैसे अनेक कल्याणकारी योजनाएँ महिलाओं की क्षमताओं को पहचान कर उन्हें राष्ट्रीय विकास व सवॉलम्बन के नेतृत्व प्रदान कर रही हैं ।

 

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